इस तस्वीर को शेयर कर मोदी और योगी को कोसा जा रहा है, जानिए क्या है सच्चाई?

आये दिन सोशल मीडिया पर कोई ना कोई अफवाह फैलती रहती है लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निशाने पर है. पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया पर लखनऊ गैंगरेप की ख़बर शेयर हो रही है. ख़बर के साथ एक निर्वस्ति महिला की तस्वीर है और इसे लोग शेयर कर लिख रहे है कि क्राइम रेट की माने तो बीजेपी सरकार का कार्यकाल समाजवादी पार्टी से भी जादा है. वहीँ कुछ लोग इस पूरे मामले पर CM योगी को कोस रहे है, वहीँ कुछ का माना है कि यह ‘भगवा गुंडों की हरकत है. चीखने और सुनने वालों की इस भीड़ में समझने वाले दूर-दूर तक नहीं दिख रहे.

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इस खबर को सोशल मीडिया पर इतना शेयर किए जा रहा है कि पीछे तस्वीर की सहूलियत भी है. तस्वीर में साफ़ देख सकते है एक महिला बिना कपड़ों के जमीन पर मुह के बल लेती हुई है, उसका शरीर खून से सना हुआ है, और आसपास भी खून ही खून फैला हुआ है. इस महिला की एक ही तस्वीर ही नहीं बल्कि ढेर सारी तस्वीरें हैं, जो बेहद वीभत्स हैं. इस तस्वीर को देखने के बाद आपको भी लगता होगा कि कोई इंसान दूसरे इंसान के साथ ऐसा बर्ताव कैसे कर सकता है. इस तस्वीर से सिर्फ बीजेपी और CM योगी को ही नहीं, बल्कि किसी भी सरकार या नेता को आसानी से घेरा जा सकता है. इस अफवाह को अब तक हजारों लोग शेयर कर चुके हैं.

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पर ये खबर नहींअफवाह हैक्योंकि

हम आपको बता दे यह मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का ज़रूर है, लेकिन योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल का नहीं है. साल 2017 का नहीं है. ये मामला जुलाई 2014 का है, जब यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. महिला की लाश मिलने पर पहली बार में ये माना गया कि उसके साथ गैंगरेप करके उसकी हत्या कर दी गई थी.

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज के बहादुरखेड़ा इलाके में 17 जुलाई 2014 को एक सरकारी स्कूल में खून से भरी नग्न महिला की लाश मिली थी. स्कूल में ऐसी हालत में महिला की लाश मिलने से चारो तरह सनसनी फैल गई थी. पुलिस कि माने तो इस महिला के साथ भी वैसी ही दरिंदगी की गई, जैसी 2012 में दिल्ली में निर्भया के साथ की गई थी. प्रशासन हिल गया था और पुलिस पूछ ताछ में झूट गयी थी. बताया जा रहा था कि इस जिस स्कूल में लाश मिली, उससे 6 किमी दूर ही वो गांव है, जहां बिल क्लिंटन उस वक्त दौरे पर गए थे.

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कुछ समय बाद जब पुलिस ने पूरे मामला की जाज में पता चला जिस महिला के साथ ये कांड हुआ, उसके पति की 2010 में मौत हो गई थी. 2011 में महिला को पति की जगह नौकरी मिल गई थी. वो पीजीआई लखनऊ के संजय गांधी में लैब अटेंडेंट का काम करती थी. लाश मिलने के बाद पुलिस ने बताया कि जिस शख्स ने भी ये किया है, वो महिला का जानने वाला ही था और ये काम कम से कम पांच लोगों का है, जो महिला के फोन पर लगातार फोन कर रहे थे.