भारत बनाने जा रहा है एक ऐसी बुलेट ट्रेन जो समुन्द्र का सीना चीर कर निकलेगी!

भारत ने पिछले दिनों की तुलना में आज बहुत विकास किया है. लेकिन आज भारत में जनसँख्या इतनी बढ़ गई है. जिसके बाद लोगों को रहने के लिए घर भी बड़ी मुश्किलों के बाद मिलता है. इतनी बढ़ती जनसँख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए बहुत से वाहनों का प्रयोग करते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा भरोसेमंद और सुविधाजनक ट्रेन को माना गया है. कहीं जाने के लिए जहाँ हमें 30 मिनट का समय लगता है वहीं ट्रेफिक में फंसने के बाद 2 घंटे लग जाते है. लेकिन जब हमें कहीं दूर के सफर पर जाना होता है. तो हम ट्रेन से सफर करना सबसे ज्यादा सुविधाजनक मानते है. जो हमें ट्रेफिक से बचाती है और हमारा समय भी बचाती है.

लेकिन आज हमारे समय को बचाने के लिए ट्रेन से भी कम समय में हमें अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए भारत एक ऐसी बुलेट ट्रेन बनाने जा रहा है. जिसके बाद आप कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर बिना ज्यादा समय बर्बाद किये पहुंच सकते है.
जानकारी के लिए आपको बता दें, “अब और सुहाना होगा बुलेट ट्रेन का सफर”. अब एक ऐसी बुलेट ट्रेन बन रही है जो समुन्द्र का सीना चीर कर निकलेगी. हैरान करने वाली बात ये है, कि मुंबई से अहमदाबाद की दूरी को ये ट्रेन केवल 2 घंटे में तय करेगी. जी हा’ देश की पहली बुलेट ट्रेन के जरिये मुंबई से अहमदाबाद जाने वाले यात्री समुन्द्र के अंदर यात्रा करके रोमांच का अनुभव कर सकेंगे.
सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलो मीटर लंबे रेल कोरिडोर में समुन्द्र के अंदर करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है. यही नहीं, अगर ये परियोजना साकार रूप लेती है. तो मुंबई से अहमदाबाद का सफर 2 घंटे में पूरा होगा.
बुलेट ट्रेन से जुड़े एक रेल अधिकारी के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद बीच का 508 किलोमीटर के हाई स्पीड रेल कोडिनेटर का 21 किलोमीटर का हिस्सा समुन्द्र के नीचे से गुजरेगा. इस ट्रेन का अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड ट्रेक पर प्रस्तावित है.  GICA की डिटेल प्रोजेक्ट के मुताबिक यह ट्रेन समुन्द्र के नीचे से लगभग 21 किलोमीटर बनी सुरंग से होकर निकलेगी.

जानकरी के लिए आपको बता दें, कि इस बुलेट ट्रेन की अनुमानित लागत 97,636 करोड़ रूपये है. जिसके लिए जापान से 81 फीसदी राशी कर्ज के रूप में ली गई है. इस ट्रेन के लिए बिजली, डिब्बे, इंजन इत्यादि, जापान से आयत किये जायेंगे और जापान के साथ किया गया ये समझौता इस साल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है.